हिमालय के ट्रेक के लिए कितनी फ़िटनेस चाहिए?
उत्तराखंड और हिमाचल के लोकप्रिय ट्रेक में रोज़ 5–8 घंटे चलना, खड़ी चढ़ाई और उतराई, और ऐसी ऊँचाई पर सोना शामिल होता है जहाँ ऑक्सीजन साफ़ तौर पर कम होती है। इसके लिए एथलीट होना ज़रूरी नहीं, लेकिन अच्छा कार्डियो और मज़बूत पैर ज़रूरी हैं। ट्रेक ऑर्गनाइज़र अक्सर तैयारी जाँचने के लिए दौड़ का एक पैमाना रखते हैं:
| ट्रेक का ग्रेड | उदाहरण | आम फ़िटनेस पैमाना |
|---|---|---|
| आसान–मध्यम | केदारकांठा, ब्रह्मताल, हर की दून | 5 किमी लगभग 40 मिनट में दौड़ना, या बिना रुके बार-बार 5–6 मंज़िल सीढ़ियाँ चढ़ना |
| मध्यम | हम्प्टा पास, फूलों की घाटी, केदारनाथ | 5 किमी लगभग 35 मिनट में दौड़ना और हल्के बैग के साथ 10 किमी चलना |
| मध्यम–कठिन | पिन पार्वती पास, 5,000 मीटर से ऊँचे पास | 10 किमी लगभग 60–70 मिनट में दौड़ना; पहले ऊँचाई वाले ट्रेक का अनुभव |
अगर अभी यह पैमाना पूरा नहीं कर पा रहे हैं तो ट्रेनिंग जल्दी शुरू करें: बिल्कुल बैठे-बैठे वाली दिनचर्या से शुरू कर रहे हों तो 10–12 हफ़्ते का समय रखें।
सबसे ज़्यादा भीड़ वाले ट्रेक और उनकी तैयारी
नीचे दिए ट्रेक पर हर सीज़न सबसे ज़्यादा ट्रेकर जाते हैं। आँकड़े अनुमानित हैं और रूट और कार्यक्रम के हिसाब से बदलते हैं।
| ट्रेक | राज्य | अधिकतम ऊँचाई | दूरी / दिन | सीज़न | ट्रेनिंग में किस पर ज़ोर |
|---|---|---|---|---|---|
| केदारनाथ | उत्तराखंड | 3,583 मीटर | गौरीकुंड से एक तरफ़ ~16 किमी; 1–2 दिन | मंदिर खुलने का समय (लगभग मई से नवंबर की शुरुआत) | लंबी, लगातार चढ़ाई: एक दिन में लगभग 1,500 मीटर। सीढ़ियों और पहाड़ी पर चलने का स्टैमिना। |
| केदारकांठा | उत्तराखंड | ~3,810 मीटर | ~20 किमी; 5–6 दिन | दिसंबर से अप्रैल (सर्दी, बर्फ़) | कार्डियो बेस, बर्फ़ में समिट-डे की खड़ी चढ़ाई, ठंड में चलना |
| ब्रह्मताल | उत्तराखंड | ~3,730 मीटर | ~24–26 किमी; 6 दिन | सर्दी | लगातार कार्डियो, उतराई के लिए पैरों की ताक़त |
| हर की दून | उत्तराखंड | ~3,540 मीटर | ~34 किमी; 6–7 दिन | अप्रैल–जून, सितंबर–नवंबर | लगातार कई लंबे दिनों का स्टैमिना |
| फूलों की घाटी | उत्तराखंड | ~3,600 मीटर (हेमकुंड साहिब ~4,630 मीटर) | घांघरिया तक ~13 किमी, फिर घाटी में दिन की सैर; ~6 दिन | जून–सितंबर (सबसे ज़्यादा फूल जुलाई के बीच से अगस्त के बीच तक) | मानसून में चलना, हेमकुंड जाएँ तो उसकी खड़ी चढ़ाई |
| हम्प्टा पास | हिमाचल प्रदेश | 4,270 मीटर | ~26 किमी; 4–5 दिन | जून के बीच से सितंबर के बीच तक | पास वाले दिन का स्टैमिना, बर्फ़ और नदी पार करना, खड़ी उतराई |
केदारनाथ यात्रा से पहले उत्तराखंड चारधाम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है। किसी भी हिमालयन ट्रेक की बुकिंग से पहले मौजूदा नियम, कपाट खुलने की तारीख़ें और मौसम की चेतावनी ज़रूर देख लें।
हिमालयन ट्रेक का 8 हफ़्ते का ट्रेनिंग प्लान
यह ढाँचा ज़्यादातर आसान–मध्यम और मध्यम ट्रेक के लिए है, उन लोगों के लिए जो पहले से थोड़े-बहुत सक्रिय हैं। अगर बिल्कुल व्यायाम नहीं करते, तो आगे बढ़ने से पहले हफ़्ता 1–2 दोबारा करें।
| हफ़्ते | कार्डियो (3 दिन) | स्ट्रेंथ (2 दिन) | ट्रेक जैसी प्रैक्टिस (1 दिन) |
|---|---|---|---|
| 1–2 | 30 मिनट तेज़ चलना या हल्की जॉगिंग/रन-वॉक | बिना वज़न के स्क्वैट, लंज, स्टेप-अप, प्लैंक: 12-12 के 2 सेट | सीढ़ियों या चढ़ाई के साथ 60–90 मिनट चलना |
| 3–4 | 35–40 मिनट लगातार आसान दौड़, या 45 मिनट साइकलिंग | 12-12 के 3 सेट, साथ में काफ़ रेज़ और साइड प्लैंक | 5–6 किलो बैग के साथ 30–45 मिनट सीढ़ियाँ चढ़ना |
| 5–6 | 5 किमी दौड़, अपने पैमाने वाले समय की तरफ़ बढ़ते हुए, साथ में एक इंटरवल सेशन | वज़न के साथ स्क्वैट और स्टेप-अप, एक-एक पैर वाली एक्सरसाइज़ | 8–10 किलो के साथ 3–4 घंटे की हाइक, उतराई समेत |
| 7 | बनाए रखें: 30–40 मिनट के रन | हल्के सेशन | सबसे लंबी हाइक: पूरे ट्रेक बैग के साथ 5–6 घंटे |
| 8 (ट्रेक वाला हफ़्ता) | दो छोटे आसान सेशन | सिर्फ़ मोबिलिटी और स्ट्रेचिंग | आराम, पैकिंग, सफ़र |
ट्रेकिंग के लिए सबसे ज़रूरी एक्सरसाइज़
- बैग के साथ सीढ़ियाँ चढ़ना: शहर में रहकर ट्रेक की सबसे असली तैयारी। 5 किलो से शुरू करके ट्रेक वाले वज़न तक जाएँ।
- स्टेप-अप: मज़बूत बेंच या सीढ़ी पर, हर पैर से 12-12 के 3 सेट; ताक़त बढ़ने पर बैग या डम्बल जोड़ें।
- स्क्वैट और लंज: जाँघ की वे मांसपेशियाँ बनाते हैं जो चढ़ाई पर ऊपर ले जाती हैं और उतराई पर संभालती हैं।
- धीरे-धीरे ढलान पर उतरना या धीमे स्टेप-डाउन: ट्रेक पर घुटने का ज़्यादातर दर्द उतराई से होता है, और इसकी ट्रेनिंग से दर्द कम होता है।
- काफ़ रेज़ और एक पैर पर बैलेंस: ऊबड़-खाबड़, पथरीली और बर्फ़ीली ज़मीन के लिए।
- प्लैंक और साइड प्लैंक: मज़बूत कोर घंटों बैग उठाकर चलते हुए भी शरीर को सीधा रखता है।
- साँस की प्रैक्टिस: ट्रेनिंग के दौरान धीमी नाक से साँस और प्राणायाम चढ़ाई पर एक स्थिर लय बनाने में मदद करते हैं।
ऊँचाई की बीमारी (AMS): फ़िटनेस क्या कर सकती है और क्या नहीं
फ़िट होने से आप हर दिन जल्दी रिकवर होते हैं और लंबी चढ़ाई झेल पाते हैं, लेकिन यह एक्यूट माउंटेन सिकनेस (AMS) से नहीं बचाता। लगभग 2,500 मीटर से ऊपर AMS किसी को भी हो सकती है, बहुत फ़िट ट्रेकर को भी।
- AMS के आम लक्षण: जी मिचलाने के साथ सिरदर्द, भूख न लगना, असामान्य थकान, चक्कर या ठीक से नींद न आना।
- धीरे-धीरे ऊपर जाएँ। 3,000 मीटर से ऊपर सोने की ऊँचाई एक दिन में लगभग 500 मीटर से ज़्यादा न बढ़ाएँ, और हर 3–4 दिन में एक आराम या एक्लिमटाइज़ेशन का दिन रखें।
- पर्याप्त पानी पिएँ, शराब से बचें और कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत अपने ट्रेक लीडर को बताएँ।
- लक्षण बढ़ें तो और ऊपर न जाएँ। नीचे उतरें।
- आराम करते हुए भी साँस फूलना, लगातार खाँसी, भ्रम या शरीर का संतुलन बिगड़ना HAPE या HACE के संकेत हो सकते हैं, जो मेडिकल इमरजेंसी हैं। तुरंत नीचे उतरें और मदद लें।
- एसिटाज़ोलामाइड (Diamox) जैसी दवाएँ सिर्फ़ डॉक्टर की सलाह पर लें।
उसी सामान के साथ ट्रेनिंग करें जिसमें ट्रेक करेंगे
- ट्रेकिंग जूते कम से कम 3–4 हफ़्ते की ट्रेनिंग वॉक में पहनकर पैरों के हिसाब से ढाल लें। ज़्यादा ट्रेक फ़िटनेस से नहीं, छालों से अधूरे रहते हैं।
- वही बैग ट्रेक वाले वज़न के साथ लेकर ट्रेनिंग करें, ताकि पहाड़ पहुँचने से पहले स्ट्रैप और फ़िटिंग ठीक हो जाए।
- अगर ट्रेकिंग पोल इस्तेमाल करने हैं तो उतराई पर उनके साथ प्रैक्टिस करें।
- केदारकांठा और ब्रह्मताल जैसे सर्दियों के ट्रेक के लिए कुछ ट्रेनिंग वॉक अपने गर्म कपड़ों की परतों में करें, ताकि पता चले चलते हुए शरीर कितना गर्म होता है।
यह फ़िटनेस की सामान्य जानकारी है, डॉक्टरी सलाह नहीं। ट्रेक की जानकारी अनुमानित है और रूट, नियम और मौसम के साथ बदलती है; अपने ट्रेक ऑर्गनाइज़र से पुष्टि करें। दिल, फेफड़े या ब्लड प्रेशर की कोई समस्या हो तो ऊँचाई पर जाने से पहले डॉक्टर से मिलें।