क्या आप अल्ट्रा मैराथन की ट्रेनिंग के लिए तैयार हैं?
42.2 किमी से लंबी हर रेस अल्ट्रा मैराथन कहलाती है। ज़्यादातर लोगों की पहली अल्ट्रा 50K होती है, अक्सर ट्रेल पर। ज़्यादातर प्लान मानकर चलते हैं कि आप एक मैराथन पूरी कर चुके हैं, या आराम से हफ़्ते में 40 किमी या उससे ज़्यादा दौड़ते हैं और 25–30 किमी के लॉन्ग रन कर चुके हैं।
| रेस | प्लान कितना लंबा | पीक ट्रेनिंग आम तौर पर |
|---|---|---|
| 50K (रोड या ट्रेल) | 12–20 हफ़्ते | 3.5–5 घंटे के लॉन्ग रन; वीकेंड पर बैक-टू-बैक रन |
| 75–100K | 20–24+ हफ़्ते | लगातार दो दिन 5–6 घंटे; रात में दौड़ने की प्रैक्टिस |
| 100 मील / कई दिनों की रेस | 6–12 महीने | पहले कई छोटी अल्ट्रा करके |
अल्ट्रा ट्रेनिंग के सबसे ज़रूरी सेशन
- पेस नहीं, पैरों पर समय: लॉन्ग रन घंटों में नापे जाते हैं। इन्हें आराम से दौड़ें और खड़ी चढ़ाई पर चलें, जैसे रेस में करेंगे।
- बैक-टू-बैक लॉन्ग रन: शनिवार को लॉन्ग रन और रविवार को मध्यम-लंबा रन। इससे थके पैरों पर दौड़ना आता है, और एक बहुत लंबे रन जितना चोट का ख़तरा नहीं होता।
- चढ़ाई: अगर रेस में बहुत चढ़ाई है, तो हफ़्ते की कुल चढ़ाई धीरे-धीरे रेस की कुल चढ़ाई की तरफ़ बढ़ाएँ, जो एक-दो हफ़्ते में बँटी हो। समतल शहरों में ट्रेडमिल इन्क्लाइन और सीढ़ियों के सेशन काम आते हैं।
- उतराई की ताक़त: लंबी उतराई बिना तैयारी वाली जाँघों को तोड़ देती है। ढलान पर दौड़ना और धीमे स्टेप-डाउन, बल्गेरियन स्प्लिट स्क्वैट जैसी एक्सरसाइज़ शामिल करें।
- पावर हाइकिंग: चढ़ाई पर तेज़ चलने की प्रैक्टिस करें, अगर रेस में पोल की इजाज़त है तो पोल के साथ। ज़्यादातर अल्ट्रा रनर सोचते हैं उससे ज़्यादा चलते हैं।
- रेस जैसी प्रैक्टिस: कम से कम एक लॉन्ग रन मिलते-जुलते रास्ते पर, अपने रेस बैग में ज़रूरी सामान के साथ और रेस वाला खाना खाते हुए।
अल्ट्रा के लिए फ़्यूलिंग और पानी
अल्ट्रा में फ़्यूलिंग अपने आप में एक हुनर है। थके पैरों से ज़्यादा अल्ट्रा पेट की गड़बड़ी से अधूरी रहती हैं।
- रेस की शुरुआत से ही हर घंटे लगभग 60–90 ग्राम कार्बोहाइड्रेट का लक्ष्य रखें। जेल और ड्रिंक के साथ असली खाना मिलाएँ, जैसे केला, नमक लगे उबले आलू, चिक्की या खजूर।
- हर लॉन्ग रन पर खाकर और रेस वाली मेहनत पर प्रैक्टिस करके पेट को इसकी आदत डालें।
- गर्मी के हिसाब से सोडियम और पानी की योजना बनाएँ, ख़ासकर खुले ट्रेल और पश्चिमी घाट की उमस भरी रेस में।
- हर 20–30 मिनट में खाने-पीने के लिए टाइमर लगाएँ; आख़िरी घंटों में भूख पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
भारतीय अल्ट्रा की ट्रेनिंग
भारत की अल्ट्रा रेस रोड अल्ट्रा से लेकर पश्चिमी घाट और हिमालय की तकनीकी पहाड़ी रेस तक हैं। आम चुनौतियाँ हैं: कम ऊँचाई पर गर्मी और उमस, घाट में मानसून के फिसलन भरे ट्रेल, लंबी चढ़ाई, और हिमालयन रेस में ऊँचाई।
- पश्चिमी घाट की ट्रेल अल्ट्रा: पकड़, जड़ों और कीचड़ के लिए सह्याद्रि के ट्रेल पर ट्रेनिंग करें, और घाट की खड़ी चढ़ाई के लिए हिल रिपीट करें।
- हिमालयन रेस: एक्लिमटाइज़ होने के लिए जल्दी पहुँचें और हाइकिंग की मात्रा बढ़ाएँ; ऊँचाई हर किसी को धीमा करती है।
- रात वाले हिस्से: अगर रेस सुबह होने से पहले शुरू होती है या रात भर चलती है, तो हेडटॉर्च के साथ दौड़ने की प्रैक्टिस करें।
टेपर और रेस की रणनीति
50K से पहले लगभग 2–3 हफ़्ते टेपर करें। जितना ज़रूरी लगे उससे कहीं धीमे शुरू करें, शुरुआत से ही चढ़ाई पर चलें, तय समय पर खाएँ, और रेस को एक एड स्टेशन से अगले एड स्टेशन तक के हिस्सों में बाँट लें।
यह ट्रेनिंग की सामान्य जानकारी है, डॉक्टरी सलाह नहीं। दूर-दराज़ के इलाक़ों में होने वाली अल्ट्रा में ज़्यादा जोखिम होता है; ज़रूरी सामान के नियम मानें और पहली अल्ट्रा से पहले मेडिकल चेक-अप कराएँ।