मैराथन की तैयारी में कितना समय लगता है?
फ़ुल मैराथन 42.2 किमी की होती है और इसकी असली ट्रेनिंग आम तौर पर 12 से 20 हफ़्ते चलती है। यह तब, जब आपका बेस पहले से बना हो: आदर्श रूप से आपने एक हाफ मैराथन दौड़ी हो, या कम से कम दो-तीन महीने से आराम से हफ़्ते में 25–30 किमी दौड़ रहे हों। यह बेस नहीं है तो पहले हाफ मैराथन करें।
| आप अभी कहाँ हैं | प्लान कितना लंबा हो | ध्यान रखें |
|---|---|---|
| नियमित 10 किमी दौड़ते हैं, हाफ मैराथन अभी नहीं की | 20+ हफ़्ते | पहले हाफ मैराथन का प्लान करें, फिर मैराथन की ट्रेनिंग |
| एक हाफ मैराथन पूरी कर चुके हैं | 16–20 हफ़्ते | हफ़्ते की दूरी और लॉन्ग रन धीरे-धीरे बढ़ाएँ |
| पहले मैराथन दौड़ चुके हैं | 12–16 हफ़्ते | मैराथन-पेस वाले रन और ज़्यादा माइलेज वाला पीक हफ़्ता जोड़ें |
| अनुभवी हैं, किसी टाइम का लक्ष्य है | 12–16 हफ़्ते | थ्रेशोल्ड सेशन, और लॉन्ग रन में रेस-पेस के हिस्से |
मैराथन प्लान के चार चरण
ज़्यादातर प्लान इन्हीं चार चरणों में चलते हैं। आप किस चरण में हैं, यह पता हो तो समझ आता है कि कोई हफ़्ता हल्का और कोई भारी क्यों लगता है।
| चरण | आम तौर पर | क्या करते हैं |
|---|---|---|
| बेस | पहले 4–6 हफ़्ते | ज़्यादातर ईज़ी रन, लॉन्ग रन 16–20 किमी तक, स्ट्राइड्स और स्ट्रेंथ |
| बिल्ड | बीच के 4–6 हफ़्ते | हर हफ़्ते एक थ्रेशोल्ड या टेम्पो सेशन, मैराथन-पेस के हिस्से, लॉन्ग रन 26–28 किमी तक |
| पीक | 2–3 हफ़्ते | सबसे ज़्यादा साप्ताहिक दूरी, 30–32 किमी का लॉन्ग रन, सबसे लंबे रेस-पेस हिस्से |
| टेपर | आख़िरी 2–3 हफ़्ते | हर हफ़्ते दूरी 20–40% कम, छोटे रेस-पेस रन बनाए रखें, आराम |
हफ़्ते की दूरी और ज़रूरी सेशन
| लेवल | हफ़्ते में रन | पीक साप्ताहिक दूरी | सबसे लंबा रन |
|---|---|---|---|
| पहली मैराथन | 4 | 40–55 किमी | 30 किमी |
| इंटरमीडिएट | 5 | 55–75 किमी | 30–32 किमी |
| एडवांस्ड | 5–6 | 75–100+ किमी | 32–35 किमी, रेस-पेस के हिस्सों के साथ |
- लॉन्ग रन हफ़्ते का सबसे अहम रन है। इसका ज़्यादातर हिस्सा आराम से दौड़ें; प्लान के बाद के हफ़्तों में कुछ लॉन्ग रन के आख़िरी 5–10 किमी अपने मैराथन गोल पेस पर ख़त्म करें।
- लॉन्ग रन लगभग 3 घंटे तक ही रखें। इससे ज़्यादा दौड़ने पर रिकवरी की क़ीमत फ़ायदे से बड़ी हो जाती है, इसीलिए प्लान पूरी दूरी तक नहीं, 30–32 किमी पर पीक करते हैं।
- थ्रेशोल्ड या टेम्पो सेशन, जैसे 10-10 मिनट के 2–3 हिस्से "थोड़ा मुश्किल पर संभलने लायक" पेस पर, उस पेस को बढ़ाते हैं जिसे आप लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं।
- बाक़ी ज़्यादातर दूरी ईज़ी रन से पूरी होती है। इन्हें सच में आसान रखें।
- बेस और बिल्ड चरण में हफ़्ते में दो बार स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, टेपर में एक बार।
मैराथन पेस चार्ट
लक्ष्य समय हाल की किसी हाफ मैराथन से तय करें: अच्छी ट्रेनिंग वाले रनर के लिए हाफ मैराथन के समय को लगभग 2.1 से गुणा करने पर मैराथन का सही अंदाज़ा मिलता है। पहली मैराथन हो तो इससे कुछ ज़्यादा समय मानकर चलें।
| लक्ष्य समय | पेस (प्रति किमी) | 10 किमी पर | 21.1 किमी पर | 30 किमी पर |
|---|---|---|---|---|
| 3 घंटे | 4:16 /km | 42:40 | 1:30:01 | 2:07:59 |
| 3 घंटे 30 मिनट | 4:59 /km | 49:46 | 1:45:01 | 2:29:18 |
| 4 घंटे | 5:41 /km | 56:53 | 2:00:01 | 2:50:38 |
| 4 घंटे 30 मिनट | 6:24 /km | 1:03:59 | 2:15:01 | 3:11:58 |
| 5 घंटे | 7:07 /km | 1:11:06 | 2:30:01 | 3:33:18 |
| 5 घंटे 30 मिनट | 7:49 /km | 1:18:12 | 2:45:01 | 3:54:37 |
| 6 घंटे | 8:32 /km | 1:25:19 | 3:00:01 | 4:15:57 |
फ़्यूलिंग: "वॉल" से कैसे बचें
"वॉल से टकराना", जो आम तौर पर 30 किमी के बाद होता है, तब होता है जब शरीर में जमा कार्बोहाइड्रेट ख़त्म होने लगता है। सही फ़्यूलिंग इसे टालती है या रोक देती है, और इसकी प्रैक्टिस ट्रेनिंग में ही करनी पड़ती है।
- रेस के दौरान हर घंटे लगभग 60–90 ग्राम कार्बोहाइड्रेट का लक्ष्य रखें, जैसे हर 25–40 मिनट में एक जेल और साथ में स्पोर्ट्स ड्रिंक। हर लॉन्ग रन पर फ़्यूलिंग करके पेट को इसकी आदत डालें।
- रेस से 1–2 दिन पहले कार्ब-लोड करें: आराम करते हुए हर खाने में चावल, रोटी, आलू, पास्ता या फल को मुख्य हिस्सा बनाएँ। कुल खाना बहुत ज़्यादा बढ़ाने की ज़रूरत नहीं।
- प्यास के हिसाब से पानी पिएँ और इलेक्ट्रोलाइट लें। उमस वाली रेस में सोडियम उतना ही ज़रूरी है जितना पानी।
- स्टार्ट से 2–3 घंटे पहले वही नाश्ता करें जिसे आप ट्रेनिंग में आज़मा चुके हैं।
भारतीय मौसम में मैराथन की ट्रेनिंग
- सीज़न: भारत की ज़्यादातर मैराथन अक्टूबर से फ़रवरी के बीच होती हैं, यानी आपके लॉन्ग रन मानसून और शुरुआती सर्दी में पड़ेंगे। तेज़ बारिश वाले दिनों के लिए इनडोर या छत वाली जगह का विकल्प पहले से सोचकर रखें।
- गर्मी और उमस: लॉन्ग रन सुबह-सुबह करें और मौसम के हिसाब से पेस बदलें। समुद्र किनारे के शहरों में सर्दी में भी उमस रहती है, इसलिए पानी और इलेक्ट्रोलाइट लेने की प्रैक्टिस उन्हीं हालात में करें।
- हवा की गुणवत्ता: उत्तर भारत में नवंबर से जनवरी तक लॉन्ग रन और भारी सेशन से पहले AQI देखें। "ख़राब" (201+) वाले दिनों में मुश्किल वर्कआउट इनडोर करें या छोटा कर दें।
- रेस का समय: कई रेस सुबह 4:30 से 6:30 के बीच शुरू होती हैं। नाश्ते समेत सुबह-सुबह लॉन्ग रन की प्रैक्टिस करें, ताकि रेस-डे का रूटीन जाना-पहचाना लगे।
टेपर और रेस-डे
आख़िरी 2–3 हफ़्तों में साप्ताहिक दूरी धीरे-धीरे घटाएँ (हर हफ़्ते लगभग 20–40%), पर मैराथन पेस वाले छोटे रन जारी रखें। टेपर के दौरान बेचैनी या सुस्ती लगना आम बात है; इसका मतलब यह नहीं कि फ़िटनेस घट गई है।
रेस-डे पर पहला आधा हिस्सा गोल पेस पर या उससे थोड़ा धीमा दौड़ें। दूसरा हाफ़ पहले जितना या उससे तेज़ दौड़ना अच्छी मैराथन का सबसे भरोसेमंद तरीक़ा है; तेज़ पहला हाफ़ आख़िरी 10 किमी को सबसे मुश्किल बनाने का सबसे पक्का तरीक़ा है।
यह ट्रेनिंग की सामान्य जानकारी है, डॉक्टरी सलाह नहीं। पहली मैराथन से पहले मेडिकल चेक-अप कराएँ, ख़ासकर अगर आपकी उम्र 40 से ज़्यादा है, दिल की कोई बीमारी है या आप नियमित व्यायाम नहीं करते रहे हैं।